भारतीय सिनेमा ,पद्मावती और सौंदर्य

संजय लीला भंसाली की पद्मावती 1 दिसंबर को प्रस्तुत होने जा रही है और देश के गलियारों में ये चर्चा गर्म है की वर्तमान कालखंड की सबसे महंगी और लोकप्रिय अदाकारा दीपिका पादुकोण को पद्मिनी बनने का गौरव प्राप्त हुआ हैI वैसे तो रानी पद्मावती के रूप- सौंदर्य का उल्लेख कईं ग्रंथों में हुआ है, परन्तु जायसी कृत ‘पद्मावत’ सबसे अधिक लोकप्रिय है, जो 1540 ईस्वी में लिखा गया था और जो रानी के सौंदर्य की समीक्षा इस वृहद कविता में की गयी है, उससे तो ये लगता है की दीपिका का लावण्य थोड़ा कम पड़ रहा हैI

साठ के दशक में अगर ये फिल्म बनती तो निसंदेह मधुबाला ही रानी पद्मिनी होतीं क्यूंकि मधुबाला नैसर्गिक सौंदर्य की धनी थीं और शायद रानी पद्मिनी बनकर इस कथा से न्याय भी कर पातींI  दरअसल पद्मावती के विलक्षण सौंदर्य के निकट पहुंचना वर्तमान कालखंड की ‘बार्बी डॉल’-सी अभिनेत्रियों के लिए असंभव हैI कुछ वर्ष पहले अगर पद्मावती बनती तो एक विकल्प ऐश्वर्या रॉय हो सकती थींI पूर्व विश्व सुंदरी प्रियंका भी कुछ हद तक इस किरदार के लिए मुनासिफ समझी जा सकती थींI

यह सर्वविदित है कि भंसाली साहब ने पद्मावती के रूप में ऐश्वर्या की ही कल्पना की थी परन्तु नियति की कुछ और ही योजना थीI ये भी सत्य है कि अपने अभिनय का लोहा मनवा चुकी दीपिका पद्मावती के किरदार को अपने अभिनय कौशल से जिवंत कर दे और दर्शक का ध्यान उस और जाए ही नहींI गौरतलब है कि भारतीय सिनेमा का इतिहास ऐसे उदाहरणों से अटा पड़ा जहां अभिनय कौसल ने सौंदर्य को मात दी होI शबाना आजमी, स्मिता पाटिल, नादिता दास, कोंकणा सेन, आदि कई अभिनेत्रियों को उनकी सुंदरता से ज्यादा उनके अभिनय से पहचाना गयाI और इसी कारण ‘कमर्शियल’ सिनेमा उनसे ज़रा दूर ही रहाI

हालांकि, दीपिका उस श्रेणी की अभिनेत्री नहीं हैं- न सौंदर्य में और ना ही अभिनय में, परन्तु रानी पद्मिनी बनकर उस सौंदर्य के शिखर को छूना इस ‘ग्लैमरस गर्ल’ के लिए एक चुनौती होगीI न सिर्फ दीपिका, बल्कि भंसाली के लिए भी ये एक कम चुनौती नहीं होगी, जो अपनी अभिनेत्रयों को सुन्दरतम रूप में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैंI

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